
करीब एक दशक से ज्यादा वक्त जेल में बिताने के बाद आखिरकार Sant Rampal को बड़ी राहत मिली है। Punjab and Haryana High Court ने देशद्रोह के एक मामले में उन्हें जमानत दे दी है। इस फैसले के बाद उनके समर्थकों के बीच खुशी की लहर दौड़ गई है, लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती।
जमानत मिली, लेकिन रिहाई अभी दूर
कोर्ट के इस फैसले के बावजूद संत रामपाल की जेल से तुरंत रिहाई तय नहीं मानी जा रही है। वजह साफ है—उनके खिलाफ अलग-अलग अदालतों में कई अन्य मामले अभी भी लंबित हैं।
कानूनी जानकारों का कहना है कि जब तक सभी मामलों में राहत नहीं मिलती, तब तक जेल के दरवाजे पूरी तरह नहीं खुलेंगे। यानी जमानत मिली है, लेकिन आज़ादी अभी अधूरी है।
2014 का बरवाला कांड: जहां से शुरू हुई कहानी
साल 2014 में हरियाणा के बरवाला स्थित सतलोक आश्रम में प्रशासन और समर्थकों के बीच जबरदस्त टकराव हुआ था। इस हिंसक झड़प में 6 लोगों की मौत हुई थी और कई लोग घायल हुए थे।
इसी घटना के बाद Sant Rampal को गिरफ्तार किया गया और उन पर कई गंभीर धाराओं में केस दर्ज हुए, जिनमें देशद्रोह का मामला भी शामिल था।
हिसार जेल में बंद संत
फिलहाल संत रामपाल हरियाणा के हिसार जेल में बंद हैं। पिछले 11 सालों में यह मामला कई बार सुर्खियों में आया, लेकिन अब जाकर हाई कोर्ट से राहत मिली है। यह फैसला उनके अनुयायियों के लिए भावनात्मक पल बन गया है, जो लंबे समय से इस दिन का इंतजार कर रहे थे।

समर्थकों में खुशी, प्रशासन सतर्क
कोर्ट के फैसले के बाद जहां समर्थकों में जश्न का माहौल है, वहीं प्रशासन भी पूरी तरह सतर्क नजर आ रहा है। पिछली घटनाओं को देखते हुए किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयारियां रखी जा रही हैं।
कौन है संत रामपाल?
Sant Rampal एक स्वयंभू संत और सतलोक आश्रम के संस्थापक हैं। उनका जन्म 1951 में हरियाणा में हुआ था। धार्मिक जीवन में आने से पहले वे सिंचाई विभाग में जूनियर इंजीनियर थे। बाद में उन्होंने कबीर पंथ से प्रेरित होकर आध्यात्मिक प्रवचन देना शुरू किया। उनके अनुयायी उन्हें संत मानते हैं और उनकी शिक्षाओं में आस्था रखते हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या संत रामपाल जल्द जेल से बाहर आएंगे? इसका जवाब उनके खिलाफ चल रहे अन्य मामलों पर निर्भर करता है। अगर उन्हें बाकी मामलों में भी राहत मिलती है, तभी उनकी रिहाई संभव होगी।
आधी जीत, पूरी लड़ाई बाकी
Sant Rampal के लिए यह फैसला राहत भरा जरूर है, लेकिन पूरी जीत अभी दूर है। कानूनी जंग जारी है और आने वाले दिनों में अदालतों के फैसले तय करेंगे कि यह राहत आज़ादी में बदलेगी या नहीं।
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